भोपाल के मोहम्मद सबिह बुख़ारी ने क़तर में गाड़े अपनी सफलता के झंडे

कहते है जब कर गुजरने का जज्बा हो तो फिर किसी भी मंजिल को पाना मुश्किल नहीं, बेशक मंजिल जितनी भी दूर क्यों न हो और इस बात की मिसाइल है हमारे देश के भोपाल शहर से ताल्लुक़ रखने वाले मोहम्मद सबिह बुख़ारी. लगभग तीन दशक पहले भारत से क़तर गए सबिह बुख़ारी ने शुरुआत में कतर में एक मामूली सी कंपनी में सेल्समैन की नौकरी शुरू की थी. आज वह देश की चंद बड़ी कंपनियों में शुमार होती है, वह कंपनी कई तरह का व्यवसाय कर रही है और सबिह बुख़ारी उसके मैनेजिंग पार्टनर है.

साल 2014 में मशहूर फोर्ब्स मैगज़ीन ने उन्हें मध्य पूर्व के 100 प्रभावी कारोबारियों की लिस्ट में शामिल किया था. बीबीसी से बात करते हुए सबिह बुख़ारी ने बताया कि उनकी इस कामयबी के पीछे अच्छी क़िस्मत का हाथ है. आगे उन्होंने बताया कि, “मैं क़तर या खाड़ी देशों में नहीं आना चाहता था. मैं भारत में ही अपना भविष्य देखता था. मगर कहते है क़िस्मत के आगे किसी की नहीं चलती तो मेरी भी नहीं चली.”

सबिह बुख़ारी बताते है कि, मैं यही सोचकर आया था कि, काम पसंद नही आया तो जल्दी ही वापिस लौट जाउगा. मैं अरबी भाषा से भी परिचित नहीं था. सेल्समैन के जिस काम के लिए मुझे लाया जा रहा था वो मुझे आता नहीं था. मगर ज़िम्मेदारी ने उन्हें वह सब कुछ सिखा दिया. जब रुकने का फ़ैसला कर लिया तो कारोबार को बढ़ाने का मंसूबा बनाया. उनका कहना है कि महज़ तीन साल के अरसे में वाटर प्रूफ़िंग के कारोबार में उनकी कंपनी देश की दूसरी बड़ी कंपनियों को पीछे छोड़ चुकी थी.

बुख़ारी कहते हैं कि वह दुनिया के कई देशों में घूम चुके हैं. हालांकि, वह क़तर को सपनों की सरज़मीं समझते हैं.उनका कहना था कि ज़िंदगी में मुश्किल हर क़दम पर आपके सामने आती है पर इंसान के पास यह ताक़त मौजूद है कि वह उसका मुक़ाबला कैसे करे. उनका मानना है कि उनकी तरक़्क़ी में मेहनत उनकी थी लेकिन फ़िर भी इसमें ‘अच्छे नसीब’ का हाथ है.

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